मुंबई, 23 जनवरी । महाराष्ट्र के जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के खिलाफ राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतक दल और मनपा चुनाव में हारे प्रत्याशी जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग कर रहे हैं।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ मनपा चुनाव के नतीजों के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष आयोग पर संदेह जता रहा है क्योंकि इन मनपा में भाजपा ने बढ़त बना ली, जबकि एनसपी को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली है। एनसीपी के अजित पवार गुट की नेता रूपाली पाटिल थोम्ब्रे ने पहले भाजपा, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनकी हार के पीछे तकनीकी त्रूटियां और गड़बड़ियां थीं। अब, जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से ठीक पहले, उन्होंने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोकतंत्र को बचाने के लिए ज़रूरत पड़ने पर वह कानून अपने हाथ में लेने से भी नहीं हिचकिचाएंगी।
इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और एनसीपी अजीत पवार गुट के विधायक अमोल मिटकरी ने चुनाव आयोग और ईवीएम के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है,। उन्होंने मांग की है कि आने वाले जिला परिषद चुनाव के चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं। दो दिन पहले, कुछ संगठनों ने सीधे चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्चा भी निकाला था। छत्रपति संभाजीनगर में विपक्षी पार्टी के पदाधिकारियों ने उस स्ट्रांग रूम पर हमला किया जहां ईवीएम रखी गई थीं। राज्य की अलग-अलग महानगरपालिकाओं में हारे हुए उम्मीदवार चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर आपत्ति जता रहे हैं।








