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एलोरा के श्री घृष्णेश्वर मंदिर में विकास कार्यों को NMA की मंजूरी


शहर 27 May 2026
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एलोरा के श्री घृष्णेश्वर मंदिर में विकास कार्यों को NMA की मंजूरी

मुंबई: नेशनल मॉन्यूमेंट अथॉरिटी (NMA) ने महाराष्ट्र के एलोरा स्थित श्री घृष्णेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए बड़े विकास कार्यों को मंजूरी दे दी है। यह मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और हर साल यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रस्तावित योजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई आधुनिक संरचनाएं विकसित की जाएंगी।

मंजूरी के तहत एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, वेटिंग एरिया, भक्तों के ठहरने की सुविधा और एक विशाल सभा मंडप का निर्माण शामिल है। इन सुविधाओं का उद्देश्य मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराना और भीड़ प्रबंधन को अधिक सुचारू बनाना है।

सूत्रों के अनुसार यह मंजूरी पत्र 25 मई को संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत मुंबई स्थित NMA कार्यालय की ओर से जारी किया गया। इससे पहले 20 मई को नई दिल्ली में आयोजित NMA की 519वीं बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई थी। बैठक के दौरान परियोजना को अंतिम रूप देते हुए मंजूरी प्रदान की गई।

इस बैठक में संबंधित जिला प्रशासन की ओर से जिला कलेक्टर विनय गौड़ा जी.सी. ने प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़, मौजूदा सुविधाओं की सीमाएं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना प्रस्तुत की। प्रेजेंटेशन में यह भी बताया गया कि विकास कार्यों से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों में सुधार होगा।

मंदिर में हर साल धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में प्रस्तावित सुविधाओं को लंबे समय से आवश्यक माना जा रहा था। नई योजना के लागू होने से परिसर में भीड़ नियंत्रण, विश्राम की सुविधा और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

हालांकि इस तरह के बड़े निर्माण कार्यों को लेकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर भी चर्चा होती रही है। ऐसे में NMA द्वारा मंजूरी देने से पहले संरक्षण मानकों और संरचना की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही गई है। फिलहाल इस परियोजना के लागू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और संबंधित विभागों के समन्वय से निर्माण कार्य की रूपरेखा तय की जाएगी। मंदिर क्षेत्र के विकास को लेकर यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलने की संभावना है।



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