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ऑटोफर्निश का 14.60 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 से 25 मई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था।


व्यापार 29 May 2026
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ऑटोफर्निश का 14.60 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 से 25 मई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था।

नई दिल्ली, 29 मई । ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एसेसरीज बनाने वाली कंपनी ऑटोफर्निश के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में प्रीमियम एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को खुश कर दिया। हालांकि उनकी खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी, क्योंकि लिस्टिंग के बाद मुनाफा वसूली हो जाने की वजह से थोड़ी देर में ही कंपनी के शेयर पर लोअर सर्किट लग गया।

आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 41 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग पांच प्रतिशत प्रीमियम के साथ 43 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण ये शेयर टूट 40.85 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ा।

ऑटोफर्निश का 14.60 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 से 25 मई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.21 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इनमें नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.17 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन भी 1.17 गुना ही सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 35.61 लाख नए शेयर जारी किए गए थे। आईपीओ के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नई मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 16 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 1.63 करोड़ रुपये हो गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी शुद्ध लाभ उछल कर 3.50 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 2.83 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 10.60 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 15.92 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 33.88 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 28.32 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी का नेटवर्थ 7.50 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 9.07 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 14.71 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी का नेटवर्थ बढ़ कर 17.57 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस के स्तर में उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 6.99 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 8.56 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस घट कर 4.76 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 7.61 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा हुआ था।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 85 लाख रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 2.82 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 5.11 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 4.49 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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