आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को प्राचीन हिमालयी चिकित्सा प्रणाली सोवा-रिग्पा को वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और संस्थागत विकास को मजबूत करके विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया।
नई दिल्ली में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर) की दूसरी शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) और उससे आगे पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की पहुंच का विस्तार करने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की।
विकास के अगले चरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए जाधव ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास से हटकर वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और अंतरराष्ट्रीय मान्यता पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सोवा-रिग्पा को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और वैज्ञानिक अध्ययनों में तेजी लाने के लिए एक स्वतंत्र अनुसंधान परिषद के गठन का प्रस्ताव रखा।
मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य अब केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है; बल्कि सोवा-रिग्पा को भारत और विश्व भर में एक मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करना है।” उन्होंने आगे कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, मजबूत शैक्षणिक संस्थानों और विश्व स्तर पर स्वीकृत मानकों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
इस प्रणाली के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, जाधव ने एनआईएसआर को केवल लद्दाख की संस्था नहीं बल्कि पूरे आईएचआर की चिकित्सा विरासत का संरक्षक बताया। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति को मजबूत करे और दुर्लभ औषधीय पौधों की सतत खेती, जैव-खोज, कृषि वानिकी और औषधीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए हिमालयी समुदायों के साथ मिलकर काम करे।
मंत्री जी ने सदियों पुराने सोवा-रिग्पा ज्ञान से युक्त सैकड़ों भोटी भाषा की पांडुलिपियों के संरक्षण का भी आह्वान किया। उन्होंने इन बहुमूल्य ग्रंथों को शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए सुलभ बनाने हेतु एक व्यापक डिजिटलीकरण, प्रतिलेखन और अनुवाद कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत की रक्षा और भविष्य के शोध को समर्थन देने के लिए यह पहल ज्ञान भारतम मिशन, संस्कृति मंत्रालय या अन्य सक्षम संस्थानों के सहयोग से की जा सकती है।
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के माध्यम से भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को संरक्षित करने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले संस्थानों को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान इस क्षेत्र में शिक्षा, नैदानिक सेवाओं, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए एक अग्रणी संस्थान के रूप में उभरा है और इसके दीर्घकालिक विकास के लिए निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान, शासी निकाय ने भारत में सोवा-रिग्पा के पुनरुद्धार, संरक्षण और संस्थागतकरण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एनआईएसआर निदेशक डॉ. पद्म गुरमेट को 2026 में पद्म श्री प्राप्त होने पर बधाई दी। सदस्यों ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत विकास के विस्तार में उनके नेतृत्व को सराहा।
संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए, डॉ. गुरमेट ने अकादमिक, अनुसंधान, नैदानिक सेवाओं, औषधीय पौधों के संरक्षण और आउटरीच गतिविधियों में हासिल की गई उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करने और देश भर में सोवा-रिग्पा की पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
सोवा-रिग्पा, जिसका भोटी भाषा में अर्थ "चिकित्सा का ज्ञान" है, विश्व की सबसे प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। आम तौर पर आमची प्रणाली के नाम से जानी जाने वाली यह प्रणाली भारतीय हिमालयी क्षेत्र और पड़ोसी देशों में व्यापक रूप से प्रचलित है। भारत के आयुष ढांचे के अंतर्गत मान्यता प्राप्त यह प्रणाली सदियों से ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में विकसित हुई है और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का एक महत्वपूर्ण भंडार बनी हुई है।
शासी निकाय की बैठक में सोवा-रिग्पा प्रणाली में शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के लिए देश की सर्वोच्च संस्था के रूप में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान को और मजबूत करने के लिए प्रमुख नीतिगत, शैक्षणिक और अनुसंधान पहलों की समीक्षा की गई। आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, संस्थागत उत्कृष्टता और व्यापक जन संपर्क के माध्यम से प्राचीन हिमालयी चिकित्सा परंपरा को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।







