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पारंपरिक चाक से इलेक्ट्रॉनिक चाक तक, विश्वकर्मा योजना ने गिरीश पाल के हुनर को दी नई रफ्तार


छत्तीसगढ़ 24 September 2026
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पारंपरिक चाक से इलेक्ट्रॉनिक चाक तक, विश्वकर्मा योजना ने गिरीश पाल के हुनर को दी नई रफ्तार

बलरामपुर, 24 सितंबर । पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम कर रहे राजपुर विकासखंड के ग्राम आरा निवासी गिरीश पाल के पारंपरिक हुनर को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से नई तकनीक का सहारा मिला है। योजना के तहत मिले इलेक्ट्रॉनिक चाक से अब वे कम समय और कम मेहनत में पहले की तुलना में अधिक बर्तन तैयार कर पा रहे हैं।

गिरीश पाल पहले साधारण चाक से मिट्टी के बर्तन तैयार करते थे। इस प्रक्रिया में अधिक समय और शारीरिक मेहनत लगती थी। इलेक्ट्रॉनिक चाक मिलने के बाद बर्तन तैयार करने का काम आसान हुआ है और उनकी कार्यक्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है।

आधुनिक उपकरण मिलने से गिरीश अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे उनकी आय बढ़ाने और व्यवसाय को विस्तार देने की संभावनाएं भी बनी हैं। पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक तकनीक जुड़ने से उनके काम में नई सुविधा आई है।

गिरीश पाल ने योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक चाक मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनके काम में काफी आसानी हुई है। उन्होंने बताया कि पहले एक साधारण चाक पर अधिक मेहनत करनी पड़ती थी, जबकि इलेक्ट्रॉनिक चाक से कम समय में काम पूरा हो जाता है।

गिरीश पाल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक कारीगरों के कौशल को आधुनिक उपकरणों का सहयोग मिलने से उनके काम को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। विश्वकर्मा योजना के माध्यम से मिले इस उपकरण ने उनके वर्षों पुराने मिट्टी के बर्तन बनाने के व्यवसाय में नई गति दी है।

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