महाराष्ट्र -मुंबई 15 अप्रैल: मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने मंगलवार को पोर्ट परिसर स्थित फायर मेमोरियल पर 1944 के बॉम्बे डॉक धमाके में जान गंवाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि देकर नेशनल फायर सर्विस डे मनाया। इस मौके पर पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व डिप्टी चेयरपर्सन आदेश तितरमारे ने किया। समारोह में महाराष्ट्र फायर सर्विसेज, मुंबई फायर ब्रिगेड, नेवल डॉकयार्ड फायर सर्विस, सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), BARC, HPCL, MIDC, RCF और एजिस लॉजिस्टिक्स सहित कई सुरक्षा और औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह आयोजन 14 अप्रैल 1944 को विक्टोरिया डॉक पर हुए SS फोर्ट स्टिकिन जहाज में हुए भीषण विस्फोट की याद में किया जाता है, जिसे मुंबई के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है। इस धमाके में भारी तबाही हुई थी और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। मृतकों में फायरफाइटर्स, पोर्ट वर्कर्स और आम नागरिक शामिल थे। विस्फोट के कारण पोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ था, जिससे पूरे इलाके में तबाही का माहौल बन गया था।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने फायर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन वीरों को याद किया जिन्होंने उस समय बेहद खतरनाक परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि फायरफाइटर्स और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मियों का योगदान समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो हर संकट की घड़ी में अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा करते हैं। डिप्टी चेयरपर्सन आदेश तितरमारे ने इस अवसर पर कहा कि 1944 की घटना आज भी हमें सुरक्षा और सतर्कता के महत्व की याद दिलाती है। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में तकनीक और सुरक्षा उपायों में सुधार हुआ है, लेकिन आपदा प्रबंधन और तत्परता की भावना को हमेशा मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।
समारोह में उपस्थित विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और फायर सर्विस कर्मियों के साहस और समर्पण को सलाम किया। सभी ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत है। यह कार्यक्रम एक गंभीर और सम्मानपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जहां सभी ने एकजुट होकर उन शहीदों को याद किया जिन्होंने देश और शहर की सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।







