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नेपाल में बालेन्द्र शाह के द्वारा लाए गए दो अध्यादेश को लेकर आरएसपी के दो सांसदों के अलग-अलग मत सार्वजनिक हुए हैं।


विदेश 29 April 2026
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नेपाल में बालेन्द्र शाह के द्वारा लाए गए दो अध्यादेश को लेकर आरएसपी के दो सांसदों के अलग-अलग मत सार्वजनिक हुए हैं।

काठमांडू, 29 अप्रैल। नेपाल में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए दो अध्यादेश को लेकर सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के दो सांसदों के अलग-अलग मत सार्वजनिक हुए हैं। सरकार ने संसद सत्र रोककर संवैधानिक परिषद और सहकारी संबंधी दो अध्यादेश जारी करने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश की है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस तेज हो गई है, और इसी बीच आरएसपी के सांसदों की अलग-अलग राय सामने आई है।

नेपाल के विपक्षी दल जहां अध्यादेश की आलोचना कर रहे हैं, वहीं आरएसपी सांसद गणेश कार्की ने कहा कि संसद सत्र रोककर अध्यादेश लाना बहादुरी नहीं है। दूसरी ओर, इसी पार्टी के सांसद राजीव खत्री ने अध्यादेश का बचाव किया है। कार्की ने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार का अध्यादेश लाना उचित नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा, “लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली पार्टी के लिए संसद सत्र रोककर अध्यादेश लाने की स्थिति क्यों आई, यह बाद में स्पष्ट होगा, लेकिन इसे बहादुरी नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि अध्यादेश लाना संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है, लेकिन इस बार संविधान की भावना का पालन नहीं किया गया। सांसद गणेश कार्की ने कहा, “इस बार भी अध्यादेश की सिफारिश संविधान के शब्दों के आधार पर की गई है, उसकी भावना के आधार पर नहीं। संविधान केवल शब्दों से जीवित रहने वाला दस्तावेज नहीं है, बल्कि उसकी भावना के पालन से ही जीवंत रहता है।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्तमान विपक्षी दलों ने पहले अध्यादेश लाए जाने पर सवाल उठाए थे, और अब अपनी ही सरकार होने के बावजूद वह वही सवाल उठा रहे हैं।

सरकार के द्वारा अध्यादेश लाने का बचाव करते हुए आरएसपी के सांसद राजीव खत्री ने कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया के माध्यम से उन सवालों का जवाब दिया, जिनमें पूछा जा रहा था कि लगभग दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार को संसद सत्र स्थगित कर अध्यादेश क्यों लाना पड़ा।

उन्होंने ऐसे सवालों को “कुतर्क” करार दिया और कहा कि कानून बनाने की प्रक्रिया लंबी होती है। सबसे पहले कानून का मसौदा तैयार किया जाता है, फिर उसे संबंधित पक्षों के लिए सार्वजनिक किया जाता है, उसके बाद संसद की समितियों में धारा-दर-धारा चर्चा होती है और फिर समिति उसे सदन में भेजती है।

राजीव खत्री ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में भी प्रक्रिया पूरी करने में लगभग दो महीने लग जाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा, “मुख्य प्रश्न यह है कि किस प्रकार का अध्यादेश लाया गया और इसका उद्देश्य क्या है?”

अपने ही सांसदों द्वारा सरकार के द्वारा लाए गए अध्यादेश का विरोध किए जाने के बाद पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने सांसदों की बैठक बुलाई है। उन्होंने सभी सांसदों को सिंहदरबार स्थित संसदीय दल के कार्यालय में बुलाने की जानकारी आरएसपी के महासचिव कविंद्र बुरलाकोटी ने दी है। ।

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