जगदलपुर, 30 जून । जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर लोहंडीगुड़ा ब्लाक की मिचनार घाटी पर्यटन क्षेत्र में तेजी से अपनी साख बना रही यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। पर्यटक यहां ऐसे खिंचे चले आते हैं मानों यहां की वादियां, फिजाएं अपने दीदार के लिए बुला रही हों। मानसून का मौसम आते ही मिचनार घाटी का दृश्य चारों ओर फैली हरियाली, बादलों को चूमती पहाड़ियां और चट्टानों से गिरते झरने यहां आने वाले हर सैलानी का मन मोह लेते हैं। मानसून की बूंदों ने मानों पूरी वादियों का श्रृंगार कर दिया है। बस्तर जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय भी अब इस क्षेत्र को विकसित करने के प्रयासों में जुटे हैं ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
बस्तर की पारंपरिक सुंदरता और आधुनिक पर्यटन के बीच का यह संतुलन इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है। यहां के शांत वातावरण में फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अद्भुत लैंडस्केप मौजूद हैं, तो वहीं ट्रेकिंग का शौक रखने वालों के लिए छोटी पहाड़ियां रोमांच का अवसर देती हैं। पिछले कुछ समय में मिचनार घाटी में पर्यटकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब न केवल स्थानीय लोग, बल्कि बस्तर से बाहर के सैलानी भी इस 'अनछुए पर्यटन स्थल' की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि मानसून के दौरान यहां की फिजाएं खुद पर्यटकों को दीदार के लिए आमंत्रित करती हैं।







