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समाज के तानों को नजरअंदाज कर जवानों के लिए भेजीं राखियां, जज्बे को सलाम


शहर 19 August 2026
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समाज के तानों को नजरअंदाज कर जवानों के लिए भेजीं राखियां, जज्बे को सलाम

मुंबई 19 अगस्त: रक्षा बंधन भाई-बहन के बीच प्यार का धागा है... लेकिन जब प्यार के इस धागे में देश सेवा की भावना जुड़ जाती है, तो इसकी एक अलग ही कीमत हो जाती है। ठाणे के प्रादेशिक मनोचिकित्सालय की मानसिक रूप से बीमार महिला मरीज़ों ने अपने हाथों से बनाई 500 राखियां बॉर्डर पर तैनात जवान सैनिकों को भेजी हैं, इस तरह रक्षा बंधन का यह पवित्र धागा सीधे देश के रक्षकों तक पहुंचा है। यह अनोखी पहल ‘वी शिव भक्त परिवार’ संस्था के ज़रिए की गई। ठाणे मनोचिकित्सालय के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ नेताजी मुलिक के मार्ग दर्शन में मरीजों ने ये राखियां बड़े प्यार और उत्साह से बनाईं। हाथों में रंग-बिरंगे धागों के साथ हर राखी में सम्मान, आभार और देश के लिए कुछ कर गुजरने का दिल से एहसास भी था।

रक्षा बंधन के दिन हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी खुशी, खुशहाली और सुरक्षा की कामना करती है। लेकिन, इन महिलाओं ने अपने भाई-बहनों के साथ-साथ देश की सीमाओं पर खड़े हजारों सैनिकों को भी अपना भाई माना और उनकी कलाई के लिए राखियां बनाईं। देश की रक्षा के लिए घर से दूर रहने वाले सैनिकों तक प्यार का यह धागा पहुंचाने की उनकी कोशिश दिल को छू लेने वाली थी। समाज में अक्सर मानसिक रूप से बीमार लोगों को सिर्फ उनकी बीमारी की नजरों से देखा जाता है। लेकिन, इस पहल ने एक खूबसूरत संदेश दिया है जो इस सोच को बदलता है। मानसिक रूप से बीमार लोगों में भी प्यार, स्नेह, संवेदनशीलता और अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत होती है। अगर उन्हें मौका और हौसला दिया जाए, तो वे भी खुशी और गर्व के साथ समाज में अपना योगदान दे सकते हैं। सीमा पर हाथों में बंदूक लेकर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों और उनकी कलाई के लिए प्यार से राखियां बनाने वाली इन महिलाओं का काम भले ही अलग-अलग हो, लेकिन देशभक्ति की भावना एक जैसी है। व्यावसायिक चिकित्सक (ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट) डॉ. जानवी केरजारकर और डॉ. अश्लेषा कोली... वगैरह ने इन राखियों को बनाने के लिए बहुत मेहनत की है। ठाणे मनोचिकित्सालय अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक ने बताया कि -इन महिलाओं की बनाई राखियां देश के प्रति उनके प्यार और सैनिकों के प्रति आभार को दिखाती हैं। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि मानसिक बीमारी वाले लोगों में भी संवेदनशीलता, हुनर और समाज में योगदान देने की क्षमता होती है। 

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