नई दिल्ली, 26 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परस्पर सीखने, एक-दूसरे की बात सुनने और निःस्वार्थ भाव से व्यवहार करने के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने आज ‘एक्स’ पर एक सुभाषितम् साझा करते हुए बताया कि जो लोग एक-दूसरे से सीखने और उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनने के लिए तत्पर रहते हैं, वे विद्वानों द्वारा प्रशंसित होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करते हैं।
प्रधानमंत्री का साझा किया गया सुभाषितम्, “ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥” इस का अर्थ है कि जो लोग परस्पर एक-दूसरे से सीखने और उनकी बातें सुनने की इच्छा रखते हैं, उनकी ज्ञानियों द्वारा प्रशंसा की जाती है। ऐसे लोग स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों और किसी प्रकार के छिपे हुए हित से दूर रहते हैं। वे निःस्वार्थ भाव से परस्पर सहयोग और संवाद करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुख और उन्नति प्राप्त करते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषितम् के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित संवाद, विनम्रता, पारस्परिक सीख और निःस्वार्थ आचरण के मूल्यों को सामने रखा है।







