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आईआईएम मुंबई और सीआरआईएसपी के साथ मिलकर स्थापित होगा ‘महा-टैक’


शहर 03 September 2026
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आईआईएम मुंबई और सीआरआईएसपी के साथ मिलकर स्थापित होगा ‘महा-टैक’

मुंबई, 02 सितंबर । महाराष्ट्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का स्वतंत्र मूल्याकन करने के लिए ‘महाराष्ट्र टेक्निकल असिस्टेंस सेल’ (महा-टैक) की स्थापना की जाएगी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), मुंबई और सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज़ (सीआरआईएसपी) के सहयोग यह सेल कार्यरत किया जाएगा। इससे सरकार को सटिक जानकारी और डेटा-बेस्ड निर्णय लेने में मदद मिल सकेगी। यह सेल मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और रिटायर्ड सेक्रेटरीज़ की हाई पावर कमेटी के प्रति जवाबदेह होगा।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वर्षा बंगले पर हुई बैठक में महा-टैक की स्थापना पर आईआईएम, मुंबई ने एक प्रस्तुतिकरण दिया। इस मौके पर मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महा-टैक’ के जरिए जन कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन और उस पर प्रभावी अमल को रफ्तार मिलेगी। राज्य सरकार कई जनहित की योजनाएं लागू कर रही है। इन योजनाओं को असरदार, पारदर्शी और लोगों तक समय पर पहुंचने की जरूरत है। यदि योजनाओं को लागू करने के बारे में सही और सटिक जानकारी समय पर मिलेगी, तो त्रूटियों को पहचान करके तुरंत सुधार करना संभव हो सकेगा। हर योजना को लागू करने और लाभार्थियों पर पड़ने वाले असर की विस्तृत जानकारी महा-टैक के पास उपलब्ध होगी। इसके माध्यम से मिलने वाला ऑब्जेक्टिव डेटा सरकार के फैसले लेने के प्रक्रिया और प्रशासन को अधिक बेहतर बनाएगा। विभाग के हेड को इस पहल को सकारात्मक नजरिए से देखना चाहिए और असरदार तरीके से लागू करने में सहयोग करना चाहिए।

महा-टैक के ज़रिए सरकार की 25 बड़ी नीतियों का आकलन किया जाएगा। विभागों की योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करने में आने वाली रुकावटों को पहचानने, उन्हें दूर करने और फैसले लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने लिए 13 सशक्त अभियान' चलाए जाएंगे। इस अभियान में लॉजिस्टिक्स और मैरीटाइम जैसे ज़रूरी सेक्टर भी शामिल किए जाएंगे। अभियान में आने वाली कमियों को दूर करने के लिए जरूरी अधिकार तय करने तक प्रक्रिया कैबिनेट की मंज़ूरी से की जाएगी।

राज्य की 25 बड़ी वेलफेयर स्कीमों का हर तीन महीने में अलग से फील्ड सर्वे किया जाएगा। राज्य के 12 ज़िलों के 11 हजार 600 लाभार्थियों का हर तिमाही में व्यक्तिगत साक्षात्कार लिया जाएगा। लगभग 1 हजार 500 वंचित घटकों की जांच की जाएगी। साल भर में कुल 46,400 लाभार्थियों का साक्षात्कार लिया जाएगा। इस आकलन से मिली रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन तुरंत सुधार कर पाएगा। महा-टैक के ज़रिए योजनाएं नियमानुसार लागू हो रही हैं या नहीं, 'लाभार्थियों को फ़ायदा' और 'खर्च से असर', दोनों पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे नीति बनाने से लेकर खर्च प्रबंधन तक, राज्य सरकार के डेटा-बेस्ड फ़ैसले लेने की प्रक्रिया को मज़बूती मिलेगी।

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