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वच’ और ‘ब्राह्मी’ ने बदली छत्तीसगढ़ में किसानों की तकदीर : मंत्री केदार कश्यप

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वच’ और ‘ब्राह्मी’ ने बदली छत्तीसगढ़ में किसानों की तकदीर : मंत्री केदार कश्यप

रायपुर 28 मई । वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा संचालित “पैडी डायवर्सन मॉडल” प्रदेश के किसानों के लिए आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। धान की पारंपरिक खेती के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने वाली इस पहल से अब तक 147 किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने आज गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार नवाचार आधारित मॉडल विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती केवल फसल परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि “पैडी डायवर्सन मॉडल” के तहत किसानों को धान के खेतों में ‘वच’ और ‘ब्राह्मी’ जैसी औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसके परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। वर्तमान में धमतरी, नारायणपुर, कोण्डागांव, बस्तर और रायपुर जिले के 23 गांवों के 147 किसानों ने 65 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती अपनाई है।

योजना के तहत 63 किसानों ने 39 एकड़ भूमि पर ‘वच’ की खेती की, जबकि 84 किसानों ने 26 एकड़ क्षेत्र में ‘ब्राह्मी’ का उत्पादन किया। धमतरी जिले में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां 16 गांवों के 90 किसानों ने 27.5 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती कर बेहतर आय अर्जित की। वहीं रायपुर जिले के 35 किसानों ने 11.5 एकड़ क्षेत्र में औषधीय फसलें उगाकर उल्लेखनीय लाभ कमाया।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के किसान भी अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बाजार आधारित औषधीय खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल किसानों को कम लागत में अधिक लाभ उपलब्ध कराने का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।

बोर्ड द्वारा किसानों को नि:शुल्क औषधीय पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण, सफल किसानों के खेतों का अध्ययन भ्रमण तथा उत्पाद की खरीदी के लिए अनुबंधित संस्थाओं के माध्यम से बाजार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इससे किसानों को उत्पादन और विपणन दोनों स्तरों पर सहायता मिल रही है।

बोर्ड के अनुसार एक एकड़ में ‘वच’ और ‘ब्राह्मी’ की खेती पर किसानों की लागत लगभग 20 हजार रुपये आई, जबकि एक वर्ष में प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हुई। कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण किसानों का रुझान तेजी से औषधीय खेती की ओर बढ़ रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को केवल सहायता नहीं, बल्कि स्थायी आय का मजबूत मॉडल देने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होने पर खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। आज “पैडी डायवर्सन मॉडल” से जुड़े किसान आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई मिसाल बन रहे हैं।

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