कोरबा, 09 सितम्बर । स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में कोरबा को 3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश में 10वां स्थान मिला है, लेकिन शहर की वायु गुणवत्ता को लेकर तस्वीर पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। सर्वेक्षण की रैंकिंग के बावजूद कोरबा में प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानक से ऊपर बना हुआ है।
बुधवार काे उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में कोरबा का वार्षिक औसत पीएम10 स्तर 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से 9 माइक्रोग्राम अधिक रहा।
कोरबा की स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि शहर देश के प्रमुख कोयला खनन और ताप विद्युत क्षेत्रों में शामिल है। खदानों, कोयला परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों, सड़क की धूल और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में भी कोरबा के पीएम10 स्तर को 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के निर्धारित मानक से अधिक बताया गया है।
रिपोर्ट में कोयला खनन, ताप विद्युत संयंत्रों और परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि कोरबा का पीएम10 स्तर 2017-18 के 57 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 2024-25 में 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। यानी निर्धारित मानक से नीचे आने के बजाय शहर का औसत पीएम10 स्तर बढ़ा है।
ऐसे में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 10वीं रैंक को कोरबा की हवा पूरी तरह साफ होने का प्रमाण मानना मुश्किल है। रैंकिंग के बावजूद शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और अधिक प्रभावी तथा जमीनी स्तर पर परिणाम देने वाले उपायों की जरूरत बनी हुई है।







