भोजन के बाद सौंफ चबाना भारतीय घरों में आम परंपरा है। इसकी मीठी खुशबू और हल्का स्वाद मुंह में ताजगी का एहसास देते हैं। हालांकि, इसका इस्तेमाल केवल माउथ फ्रेशनर तक सीमित नहीं है। सब्जियों, अचार, रोटी और मिठाइयों में भी सौंफ स्वाद बढ़ाती है। पोषण के लिहाज से इसके बीजों में फाइबर और कुछ खनिज पाए जाते हैं। लेकिन सामान्यतः खाई जाने वाली छोटी मात्रा को देखते हुए इसे पोषण का मुख्य स्रोत या किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं होगा।
पाचन में मदद का पारंपरिक इस्तेमाल सौंफ का इस्तेमाल लंबे समय से पेट फूलने और गैस जैसी हल्की पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। यूरोपीय औषधि एजेंसी ने भी मीठी सौंफ के कुछ हर्बल उत्पादों के पारंपरिक उपयोग में इन शिकायतों का उल्लेख किया है। यहां पारंपरिक इस्तेमाल और मजबूत चिकित्सकीय प्रमाण के बीच अंतर समझना जरूरी है। हर व्यक्ति को सौंफ से एक जैसा लाभ नहीं मिलता। लगातार पेट दर्द, बार-बार गैस या लंबे समय से कब्ज होने पर केवल सौंफ पर निर्भर रहने के बजाय कारण की जांच करानी चाहिए। भोजन में इसका उपयोग स्वाद और व्यक्तिगत सहनशीलता के अनुसार किया जा सकता है।
सौंफ में विभिन्न पादप यौगिक पाए जाते हैं। इनके एंटीऑक्सीडेंट गुणों और संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध हुआ है। हालांकि, प्रयोगशाला अथवा पशुओं में मिले परिणामों को सीधे मनुष्यों में बीमारी से बचाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सौंफ खाने से मधुमेह नियंत्रित होने, तेजी से वजन घटने या गंभीर बीमारियां ठीक होने के दावे स्थापित नहीं हैं। इसके बीजों और ताजा सौंफ की सब्जी के पोषण संबंधी आंकड़े भी अलग होते हैं। इसलिए ताजा सब्जी में पाए जाने वाले विटामिन या फाइबर की मात्रा को एक चुटकी सूखी सौंफ से मिलने वाला पोषण समझने की गलती न करें।
भोजन के बाद सादी सौंफ इसे शामिल करने का सबसे आसान तरीका भोजन के बाद थोड़ी सादी सौंफ चबाना है। चाहें तो इसे हल्का सूखा भूनकर ठंडा कर लें। तेज आंच पर जलाने से स्वाद खराब हो सकता है। शुरुआत छोटी मात्रा से करें और देखें कि यह आपको अनुकूल लगती है या नहीं। बाजार में मिलने वाली रंगीन, चीनी की परत चढ़ी सौंफ और सादी सौंफ अलग उत्पाद हैं। मीठे मिश्रण खरीदते समय सामग्री सूची देखें। सौंफ के साथ चीनी मिलाने से वह अतिरिक्त चीनी का स्रोत बन जाती है। मुंह की दुर्गंध लगातार बनी रहे तो दांतों और मसूड़ों की जांच भी जरूरी है।
सब्जी और दाल में लगाएं तड़का आलू, कद्दू या अन्य सब्जियों में सौंफ की हल्की सुगंध अच्छी लग सकती है। तड़का लगाते समय जीरे के साथ थोड़ी सौंफ डालें। इसे हल्का दरदरा कूटकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। एक साथ बहुत अधिक डालने के बजाय स्वाद देखकर मात्रा बढ़ाएं। दाल या सूप में भी इसकी छोटी मात्रा आजमा सकते हैं। सौंफ का स्वाद कुछ मीठा होता है, इसलिए हर व्यंजन में यह समान रूप से पसंद नहीं आएगी।
पहले छोटी मात्रा में प्रयोग करना बेहतर रहेगा। रोटी और पराठे का बदलें स्वाद आटा गूंथते समय दरदरी सौंफ मिलाने से रोटी या पराठे में नया स्वाद आ सकता है। इसे अजवाइन अथवा दूसरे मसालों के साथ अपनी पसंद के अनुसार मिला सकते हैं। हालांकि, सौंफ डाल देने से अधिक तेल या घी वाला पराठा अपने आप स्वास्थ्यवर्धक नहीं बन जाता।
पूरे व्यंजन की सामग्री और मात्रा महत्वपूर्ण रहती है। घर की नमकीन बेकिंग, मठरी या दूसरे व्यंजनों में भी इसका स्वाद उपयोग किया जा सकता है। रोजमर्रा के लिए ऐसे विकल्प चुनें जिनमें अतिरिक्त नमक और वसा कम हो। रायता, चटनी और मीठे व्यंजन सादे दही में खीरा और हल्की भुनी सौंफ का पाउडर मिलाकर रायता बना सकते हैं।
पुदीने या धनिए की चटनी में भी थोड़ी सौंफ मिलाकर स्वाद बदलें। खीर या दलिया जैसे व्यंजनों में इलायची के साथ इसका हल्का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये भोजन में स्वाद जोड़ने के सुझाव हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार वाली विशेष रेसिपी न समझें।
सौंफ की सुगंध पसंद न हो तो उसे खाना जरूरी भी नहीं है। सौंफ का पानी कोई जरूरी स्वास्थ्य नियम नहीं सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीने से शरीर की सफाई, पेट की चर्बी खत्म होने या तुरंत वजन घटने के दावे प्रमाणित नहीं हैं। रोज कई कप गाढ़ी सौंफ चाय पीना भी आवश्यक नहीं है। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने सौंफ के कुछ तैयार उत्पादों में मौजूद एस्ट्रागोल की सुरक्षा पर अपने प्रारूप आकलन में चिंता जताई थी, विशेषकर संवेदनशील समूहों के लिए।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा छोटे बच्चे सौंफ की नियमित औषधीय चाय, अर्क या सप्लीमेंट बिना चिकित्सकीय सलाह न लें। सौंफ का तेल और सामान्य रसोई की सौंफ एक जैसी चीजें नहीं हैं। भोजन में विविधता, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।







