मुंबई 30 अप्रैल: उद्धव ठाकरे ने इस बार विधान परिषद सदस्य न बनने का फैसला लिया है। उनके स्थान पर उद्धव सेना चाहती है कि अंबादास दानवे को सदन में भेजा जाए। उद्धव ठाकरे ऐसे पहले सदस्य थे, जो ठाकरे फैमिली से सदन में पहुंचे थे। इसको लेकर यह भी कहा गया था कि यह गलत परंपरा है और बालासाहेब ठाकरे से अलग है, जो खुद कभी किसी सदन के लिए निर्वाचित नहीं हुए थे। ऐसे में उनके फैसले को खुद को सही करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि भले ही उद्धव ठाकरे विधान परिषद के मेंबर नहीं बनना चाहते, लेकिन INDIA अलायंस अब उनके स्थान पर किसी उद्धव सेना के किसी और नेता के नाम पर सहमत नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि उद्धव ठाकरे खुद सदन नहीं जाएंगे तो फिर वह अपना कैंडिडेट उतार सकती है। महाराष्ट्र में विधान परिषद की कुल 9 सीटें खाली हो रही हैं और इनमें से एक सीट ही विपक्षी गठबंधन जीतने की स्थिति में है। ऐसे में हालात एक अनार सौ बीमार वाले बन रहे हैं। उद्धव ठाकरे बड़े नेता हैं तो उनके आगे कोई दावेदारी नहीं जता रहा था, लेकिन जब वह पैर पीछे हटा रहे हैं तो फिर कांग्रेस की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं। 2020 में जब उद्धव ठाकरे सीएम बने थे तो एनसीपी और कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद जाने को कहा था। इस तरह सत्ता के लिए तीनों दल एकजुट थे, लेकिन अब विपक्ष में रहने के दौरान एक-एक सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बन रही है।
पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। उनका कहना था कि वह खुद चुनाव में उतरें। इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि सेना चीफ खुद नहीं विधान परिषद जाएंगे तो फिर कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतारना चाहती है। बुधवार को हर्षवर्धन सकपाल दिल्ली में थे और पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि उन्होंने हाईकमान से यह मांग की है कि अब उद्धव की खाली हो रही सीट पर कांग्रेस को अपना कैंडिडेट उतारना चाहिए। हालांकि उद्धव सेना ऐलान कर चुकी है कि हम अंबादास दानवे को उद्धव के स्थान पर भेजेंगे।
कांग्रेस बोली- हम उद्धव सेना के खिलाफ उतार सकते हैं कैंडिडेट ऐसे में यदि कांग्रेस की ओर से अपने कैंडिडेट के लिए दबाव बनाया गया तो तय है कि आपस में खींचतान शुरू हो जाएगी। कांग्रेस की एक दलील यह भी है कि आखिर उद्धव सेना सहयोगी दलों को भरोसे में लिए बिना एकतरफा फैसला कैसे कर सकती है। यही नहीं एक अन्य कांग्रेस नेता भाई जगताप ने तो दानवे के खिलाफ कैंडिडेट ही खड़े करने की बात कर दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में सही राय तो सकपाल रखेंगे, लेकिन मुझे इतनी जानकारी है कि अंबादास दानवे के खिलाफ कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतार सकती है। अब यह मामला रोचक होता दिख रहा है क्योंकि विपक्ष में बंटवारा होते देख भाजपा और शिवसेना की ओर से एक अतिरिक्त कैंडिडेट भी उतारा जा सकता है।







