मुंबई, 03 अक्टूबर I खून की एक बूंद तीन मरीज़ों के लिए ज़िंदगी की उम्मीद बन सकती है। पिछले साल डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में 2700 ब्लड डोनर्स ने ब्लड डोनेट( रक्तदान ) किया था। इंसानियत के इस जज़्बे को और मज़बूत करने के लिए, नेशनल वॉलंटरी ब्लड डोनेशन डे के मौके पर 'इंसानियत की एक बूंद, खून दो; जानें बचाओ' मैसेज के साथ रेगुलर ब्लड डोनेशन की अपील की गई।
हाल ही में नेशनल वॉलंटरी ब्लड डोनेशन डे के मौके पर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, ठाणे में एक पब्लिक जागरूकता प्रोग्राम हुआ। इस मौके पर डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. कैलाश पवार, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े, डॉ. महेंद्र केंद्रे, डॉ. दुबे, ब्लड बैंक टीम, नर्सिंग स्कूल के इंचार्ज और स्टूडेंट्स मौजूद थे। डॉ. पवार ने ब्लड डोनेशन की अहमियत, ब्लड डोनर्स के लिए क्राइटेरिया और रेगुलर ब्लड डोनेशन की ज़रूरत के बारे में गाइड किया।
थैलेसीमिया, सिकल सेल, कैंसर, मेजर सर्जरी, एनीमिया मरीज़ों और गर्भवती महिलाओं की सर्जरी के दौरान खून की बहुत ज़रूरत होती है। 18 से 60 साल की उम्र के लोग, जिनका वज़न 45 किलो से ज़्यादा हो और हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से ज़्यादा हो, मेडिकल जांच के बाद खून दे सकते हैं। रक्तदान करने वाले ( डोनर) का ब्लड प्रेशर, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी ज़रूरी बातों की जांच के बाद लगभग 350 एमएल खून इकट्ठा किया जाता है।
क्योंकि इकट्ठा किए गए खून से प्लेटलेट्स, प्लाज़्मा और पैक्ड सेल्स नाम के तीन हिस्से बनते हैं, इसलिए एक खून के दान से तीन मरीज़ों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि इंसानी खून का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए लोगों से अपील की गई कि वे साल भर अपनी मर्ज़ी से रेगुलर खून दें। इस मौके पर मौजूद लोगों को खून देने का वादा भी दिलाया गया।
ठाणे सिविल सर्जन डॉ कैलाश पवार का कहना है कि -खून देना सिर्फ़ खून देना नहीं बल्कि किसी की जान बचाने का एक मौका है। क्योंकि खून का कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है, इसलिए लोगों को गलतफहमियां दूर करनी चाहिए और अपनी मर्ज़ी से रेगुलर खून देना चाहिए। हर खून देने वाला किसी की ज़िंदगी में उम्मीद की किरण मानवता के नाते होता है।







