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नए श्रम कानूनों पर महाराष्ट्र सरकार की बड़ी तैयारी


शहर 08 July 2026
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नए श्रम कानूनों पर महाराष्ट्र सरकार की बड़ी तैयारी

मुंबई  08 जुलाई: महाराष्ट्र सरकार ने नए केंद्रीय श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के श्रम मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर ने श्रम विभाग को निर्देश दिए हैं कि चार नए केंद्रीय श्रम कोड के तहत तैयार किए गए राज्य के मसौदा नियमों (ड्राफ्ट रूल्स) पर ट्रेड यूनियनों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए। सभी संबंधित पक्षों के सुझाव और आपत्तियां प्राप्त करने के बाद एक समेकित (कंसोलिडेटेड) रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी जाएगी।

यह निर्णय सोमवार को मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। बैठक की अध्यक्षता स्वयं श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने की। इसमें श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ समितियों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में चारों नए श्रम कोड से जुड़े मसौदा नियमों की समीक्षा की गई और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रेड यूनियनों से संवाद पर सरकार का जोर समीक्षा बैठक में श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रम कानूनों में होने वाले बदलावों का सीधा प्रभाव लाखों श्रमिकों और उद्योगों पर पड़ने वाला है। इसलिए इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले श्रमिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अन्य हितधारकों की राय लेना आवश्यक है।

शिवसेना पार्षद और समर्थकों पर केस उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रम विभाग द्वारा गठित चार विशेषज्ञ समितियां ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जॉइंट एक्शन कमेटी) के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों में प्रत्येक मसौदा नियम पर विस्तार से चर्चा की जाए ताकि सभी पक्षों की राय को शामिल किया जा सके। चार प्रमुख श्रम संहिताओं पर होगी चर्चा महाराष्ट्र सरकार जिन चार केंद्रीय श्रम संहिताओं के तहत राज्य के नियम तैयार कर रही है, उनमें शामिल हैं— A

महाराष्ट्र वेज कोड रूल्स (Maharashtra Wage Code Rules) – मजदूरी से जुड़े नियमों को सरल और एकीकृत बनाने के लिए। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड रूल्स (Industrial Relations Code Rules) – उद्योगों और कर्मचारियों के बीच संबंधों, विवादों के समाधान और रोजगार संबंधी प्रावधानों के लिए। ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड रूल्स (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code Rules) – कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और श्रमिकों की कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से।

सोशल सिक्योरिटी कोड रूल्स (Social Security Code Rules) – कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा लाभ, पेंशन, बीमा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रावधानों के लिए। इन चारों कोड को केंद्र सरकार ने देशभर में श्रम कानूनों को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है। हालांकि इन्हें प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राज्यों को अपने-अपने नियम बनाने होते हैं। विशेषज्ञ समितियों को दिए गए निर्देश बैठक में श्रम मंत्री फुंडकर ने कहा कि विशेषज्ञ समितियां प्रत्येक मसौदा नियम का गहन अध्ययन करें और श्रमिक संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करें। यदि ट्रेड यूनियनों की ओर से कोई व्यावहारिक सुझाव या संशोधन प्रस्तावित किए जाते हैं, तो उन्हें गंभीरता से परखा जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करना है जिससे उद्योगों की जरूरतों और श्रमिकों के अधिकारों के बीच संतुलन कायम रहे। सभी सुझावों को शामिल कर बनेगी रिपोर्ट श्रम विभाग को निर्देश दिया गया है कि विभिन्न बैठकों और चर्चाओं के दौरान प्राप्त सभी सुझावों, आपत्तियों और सिफारिशों को एकत्रित किया जाए। इसके बाद एक विस्तृत और समेकित रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की ओर से एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण सामने आएगा तथा नए श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। श्रमिकों और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कदम विशेषज्ञों का मानना है कि नए श्रम कोड का उद्देश्य देश के श्रम कानूनों को सरल बनाना और उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। वहीं श्रमिक संगठनों का कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले कर्मचारियों के हितों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी कारण महाराष्ट्र सरकार ने नियमों को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक परामर्श की प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है। सरकार ने जताई संतुलित नीति की प्रतिबद्धता श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने बैठक में कहा कि महाराष्ट्र सरकार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और औद्योगिक विकास दोनों के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा श्रम ढांचा तैयार करना चाहती है जो उद्योगों के लिए अनुकूल होने के साथ-साथ श्रमिकों के हितों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने अधिकारियों से परामर्श प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। जल्द आगे बढ़ेगी प्रक्रिया बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में विशेषज्ञ समितियां विभिन्न ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के साथ कई दौर की बैठकें करेंगी। इन बैठकों के आधार पर अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा और फिर उसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को नए श्रम कानूनों के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। व्यापक परामर्श के बाद तैयार होने वाले नियम राज्य में श्रमिकों और उद्योगों दोनों के लिए भविष्य की श्रम व्यवस्था की दिशा तय करेंगे।

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