लातूर। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के कथित पेपर लीक मामले पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया। औसा विधायक अभिमन्यु पवार की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया है। विधायक अभिमन्यु पवार का आरोप है कि पेपर लीक मामले से उनका कोई संबंध नहीं होने के बावजूद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन पर संदेह पैदा करने और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। इसी शिकायत के आधार पर औसा पुलिस ने हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा था, "क्या एमपीएससी पेपर लीक केस के मास्टरमाइंड देवेंद्र फडणवीस हैं? सूत्रों का कहना है कि एमपीएससी (फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर रिक्रूटमेंट) पेपर लीक के तार अब पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिस तक पहुंच गए हैं। खास तौर पर, चर्चा है कि इस मामले में शक मुख्यमंत्री के पूर्व पीए और अब भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार की ओर जा रहा है।"
हर्षवर्धन सपकाल ने 'एक्स' पर किए पोस्ट में आगे लिखा था, "फडणवीस के मुख्यमंत्री रहने के दौरान, 2017-18 के मेगा रिक्रूटमेंट पोर्टल स्कैम के साथ-साथ तलाठी रिक्रूटमेंट - 2023; एमएचएडीए; पुलिस रिक्रूटमेंट; फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रिक्रूटमेंट; सॉइल एंड वॉटर कंजर्वेशन डिपार्टमेंट रिक्रूटमेंट और उनके नेतृत्व में हुए मौजूदा फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर रिक्रूटमेंट स्कैम केस की निष्पक्ष जांच की तुरंत जरूरत है। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक राज्य में लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों को राख में मिलाने वालों और उनके भविष्य के साथ क्रूर खेल खेलने वालों का पर्दाफाश नहीं हो जाता।"
सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट में हर्षवर्धन सपकाल ने लिखा था, "भाजपा सरकार ने शिक्षा क्षेत्र का व्यवसायीकरण किया, औद्योगिक क्षेत्र को बर्बाद किया और युवाओं के सपनों को राख में मिला दिया। उन्होंने लिखा था, "भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक का ग्रहण लग गया है। नीट, टीईटी और अब एमपीएससी, जो सरकार बार-बार छात्रों की मेहनत पर पानी फेरती है, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।" हर्षवर्धन सपकाल ने 'एक्स' पर एक और पोस्ट में लिखा था, "पेपर लीक, भर्ती घोटाले, ग्रेडिंग में गड़बड़ी और सबूत सामने आने के बाद भी सरकार चुप है। यह चुप्पी शक को और भी गहरा करती है।"







